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35 वां कवि सम्मेलन: नफरत का जाम मुझसे तो ढाला ना जाएगा….ये काम मेरे दिल से संभाला ना जाएगा…

ऐसा बांधा शमा की रात भर जगह से नहीं हिले लोग

35वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा में विभिन्न रस के कवियों ने कविताओं से किया दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

दुद्धी/ सोनभद्र| 35वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन कल बुधवार की रात्रि कचहरी स्थित डॉ राजेन्द्र प्रसाद भवन में सम्पन्न हुआ| मुख्य अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष राजकुमार अग्रहरि ने माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया वहीं कवियत्री विभा शुक्ला ने माँ सरवस्ती के वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया| इसी के बाद कवियों की महफ़िल सजाई गई जिसमें प्रदेश व जिले के नामी गिरामी कवियों ने अपने अपने विभिन्न रस की कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया|कवियों ने ऐसी शमा बांधी कि रात भर लोग अपने जगह पर डटे रहे और बीच बीच में हास्य व व्यंगात्मक कविताओं से लोट पोट होते रहे|

वाराणसी से आये कवि नागेश साडिल्य ने तेज स्कूटी से जाती आतंकवादीनुमा लड़की …मेरे घूरकर देखने पर अत्यंत जोरों से भड़की कविता को सुनाकर कर दर्शकों को लोटपोट किया वहीं देवरिया से आये कवि बादशाह तिवारी ‘ प्रेमी’ के नमस्ते की भाषा समझते नही जो, उन्हें भी सबक ये सिखाने लगा है ,मोहब्बत में दूरी जरूरी है क्योंकि कोरोना का डर अब सताने लगा है..के समसामयिक बोल ने ओत पोत कर दिया|

वाराणसी से आये इमरान बनारसी के दिलों दिमाग में अमनो अमान रखते है ,मोहब्बतों का फकत हम जहां रखते है , यकीन ना आये तो सीने को चीर कर देखो हम अपने सीने में हिंदुस्तान रखते है …कि बोल ने गंगा जमुनी के तहजीब की मिसाल पेश की|कवि हसन सोनभद्री के राम अवध पुरुकुल बंशीधर ,कवि की शान है कविता,कवि की अरमान है कविता ,कुछ तो जीने के लिए कर जाए ,आओ एक दूसरे पर मर जाये के बोल समाज मे एक दूसरे के सौहार्द फैलाने की संदेश दर्शाया|वहीं उप प्रभागीय वनाधिकारी रेनुकूट व गोरखपुर के चर्चित कवि मनमोहन मिश्रा ने नफरत का जाम मुझसे ढाला ना जाएगा ,ये काम मेरे दिल से संभाला ना जाएगा , बेकार कर रहा हूँ यू नाकाम कोशिशें , मिलने कभी सियह से उजाला ना जाएगा के मधुर बोल ने लोंगो को रोमांचित कर दिया|बिहार से चलकर आये लोकनाथ तिवारी ‘ अनगढ़’ ने आई हो मेरी जिंदगी में तुम जुगाड़ करके,मेरे घर मे सोई रहती हो तुम पहाड़ बनके के बोल ने पति पत्नी के बीच के आधुनिक संबंधों को प्रस्तुत किया|कवियत्री विभा शुक्ला के दिल के कोने याद बसाए बैठे दूर से ही पूछे जा हम आज मिलने आ सकते …के बोल से कविता सुनाई|कवि कमलेश राजहंस के ‘ अश्कों पे सियासत के होता नहीं यकीन
,घड़ियाल के आंखों में आंसू नहीं बहते ,खादी के लिबासपर दिखते लहू के दाग ,खादी के उस लिवास में बापू नही रहते|’ के बोल से आधुनिक समाज को परिभाषित किया| कवियों के महफ़िल में पूरी रात हँसने हँसाने व रोमांच का दौर चलता रहा पूरी रात श्रोताओं ने कवि सम्मलेन का भरपूर लुफ्त उठाया| कार्यक्रम का शुरुवाती संचालन अविनाश गुप्ता ने तथा कवि मंच का संचालन कमलेश राजहंस ने किया| इस मौके पर समिति के अध्यक्ष रामलोचन तिवारी , सचिव शिवशंकर प्रसाद ,कोषाध्यक्ष मदन मोहन तिवारी के साथ रामेश्वर राय, अधिवक्ता सत्यनारायण यादव ,जगदीश्वर जायसवाल ,रेंजर दिवाकर दुबे,प्रभु सिंह कुशवाहा ,संगीता वर्मा ,वंदना कुशवाहा ,विष्णु कांत तिवारी ,सैयद फैजुल्लाह ,कौनेन अली के साथ काफी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे|

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