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राजकीय आईटीआई धनौरा को उच्चकोटि के संस्थान में बदलने वाले शिल्पीकार अनुशासन के पर्याय डी के सुमन नहीं रहें

कोरोना से हारी जिंदगी का जंग ,42 वर्ष के उम्र में हुआ निधन

37 वर्ष की उम्र में 2016 में राजकीय आईटीआई धनौरा में थे बतौर प्रिंसिपल हुई थी तैनाती

(पीडीआर ग्रुप)

दुद्धी/ सोनभद्र| राजकीय आईटीआई धनौरा में बतौर नोडल प्रिंसिपल कार्यरत अपनी लग्न और काबिलियत से पांच वर्ष पूर्व कबूतरखाना बना राजकीय आईटीआई धनौरा को शासन में लगातार पत्राचार कर विभिन्न कार्यों को करवाकर विद्यालय को उपलब्धियां हासिल करवा कर जनपद का एकमात्र उच्चकोटि संस्थान में तब्दील करने वाले 42 वर्षीय धीरेंद्र कुमार सुमन नहीं रहें ,आज भोर में 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली,उनकी कोरोना से निधन हो गया ,ये रायबरेली के रहने वाले थे| ये अपनी हंसता खेलता परिवार को अलविदा कह गए| श्री उनके पत्नी के सिर से पति और उनके दो छोटे छोटे बच्चे( क्रमशः 12वर्ष व 9वर्ष ) के सिर से पिता का साया उठ गया|
आईटीआई में कार्यरत शिक्षक विनोद यादव ने बताया कि 12 अप्रैल को इनकी तबियत बिगड़ी थी तो वाराणसी के निजी अस्पताल वरदान फिर गैलेक्सी में उपचार कराया जब यहां से स्थिति सुधार नहीं हुआ तो लखनऊ के मेदांता अस्पताल में एडमिट थे| जो आज कोरोना से जंग हार गए|

उनके निधन से उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गयी|आज संस्थान के गुरुजनों ने विद्यालय में दो मिनट का मौन रख उनके मृत आत्मा की सदगति देने की कामना की| इस अवसर पर विनोद यादव , संजय श्रीवास्तव ,बीएन सिंह मौजूद रहे, उधर गणेशदत्त आईटीआई मल्देवा में भी डॉ लवकुश प्रजापति की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया और उन्हें श्रद्ध सुमन अर्पित किया गया|

बता दे कि धीरेंद्र कुमार सुमन आज से लगभग 5 वर्ष पूर्वदुद्धी राजकीय आईटीआई में चार्ज लिया था तो संस्थान की स्थिति जीर्ण शीर्ण थी संस्थान कि ज्यादातर खिड़कियां के दरवाजे टूट कर झूल रहे थे और शीशे टूटे हुए थे,पठन पाठन का कार्य औसत चल रही थी,इन्होंने आते ही पहले संस्थान में अनुशासन लागू किया,शिक्षकों व छात्र छात्राओं की हाजिरी में बॉयोमेट्रिक हाजिरी लागू किया,परिसर की साफ सफाई ,के साथ विद्यालय को रंगरोगन का कार्य कराया ,जीर्ण शीर्ण हो चुके दरवाजे व खिड़कियों को मरम्मत कराया|इसके बाद विद्यालय में एससीवीटी के साथ एनसीवीटी पाठ्यक्रम भी लागू कराया|गिने चुने ट्रेडों से पढ़ाई होने वाले संस्थान में 17 ट्रेडों के साथ पढ़ाई को संचलित किया ,संस्थान में आईटी लैब , स्मार्ट क्लास , डीजल मैकेनिक ,टर्नर ,वेल्डर ,फिटर प्रशिक्षुओं के ट्रेनिंग के लिए भारी भरकम वर्कशाप, भी अपनी कुशल देखरेख में बनवाया संस्थान के चारों तरफ चाहर दिवारी का निर्माण कराया|पूरे कैम्पस में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 1000 पौधों का पौधरोपण स्वयं व अध्यापकों के सहयोग से लागया था , उनके लगाए पौधें अब वृक्ष का रूप ले लिए है ,पूरे संस्थान का जीर्णोद्धार कराने का कार्य कराया था| आज राजकीय आईटीआई धनौरा का जिले के उत्कृष्ठ संस्थानों में से है जो इनके असीम प्रयासों का फलस्वरूप है |बताते चले कि यहां उनकी गोरखपुर के बाद दूसरी पोस्टिंग थी|

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