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पर्यावरण के प्रति जन जन समझेगा जिम्मेदारी तभी पूरा होगा संरक्षण का संकल्प

पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में डीपीएस स्कूल में हुआ गोष्ठी का हुआ आयोजन

पर्यावरण विद सुंदरलाल बहुगुणा के मृत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का रखा मौन

(पीडीआर ग्रुप)

दुद्धी/ सोनभद्र| स्थानीय क़स्बे डीपीएस स्कूल में आज पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति दुद्धी के तत्वाधान में प्रबुद्धजनों व पदाधिकारियों की उपस्थिति में एक गोष्ठी का आयोजन कर और परिसर में पौधरोपण कर विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया|इस दौरान सहजन ,अमरूद ,आम ,अमरूद सहित अन्य प्रजातियों के कुल 11 पौधों का पौधरोपण किया गया|

गोष्ठी को संबोधित करते हुए समिति के प्रवक्ता व जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के महसचिव व अधिवक्ता महासचिव प्रभु सिंह कुशवाहा ने कहा शुद्ध पर्यावरण ही हमें जिंदगी प्रदान करती है ,आज कोरोना महामारी ने साबित कर दिया कि आक्सीजन की जिंदगी में क्या महत्ता व उपयोगिता है| शासन ने 2016 में प्लास्टिक कचरा मुक्त करने का योजना चलाई तो पर्यवारण संरक्षित के लिए पेड़ लगवाने के लिए निरंतर मुहिम चला रही है ,लेकिन जब तक हम सब मिलकर और प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता| 1972 में जब 119 देशों के राज नायकों की यूएनओ में मीटिंग हुई उसी समय सभी देशों ने निर्णय लिया कि 1974 को हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाएंगे| आज मनुष्य प्रकृति से ,उगे पेड़ को काट रहे है|कहा कि पर्यावरण को संतुलित बनाने में अहम योगदान देने वाले हरे भरे वृक्षों का जंगल की रखवाला वन विभाग के अधिकारी तस्करों से सेटिंग कर जंगल कटवा कर बेचवा रहे है ,यहां के अधिकारी गठजोड़ कर जंगलों की कटवाना और बालू की खनन करवाना इनका मुख्य पेशा बना हुआ है ,कहा कि पेड़ लगाना बड़ी बात नहीं है पेड़ बचाना जरूरी है| सोनभद्र की औद्योगिक प्रतिष्ठान सोनभद्र की पर्यावरण को पंगु बना रहे है इनके चिमनियों से निकलने वाला धुंआ मानक से अधिक जहर उगल रहे है|इसके लिए जिला प्रशासन को संज्ञान ले ऐसे कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए|

आरएसएस के जिला सह संघचालक नन्दलाल एडवोकेट ने कहा कि दुनिया की शक्तिशाली देश आज एक छोटे से महामारी ने हिला कर रख दिया|यह असंतुलित पारिस्थितिकी तंत्र की देन है विकास की होड़ में दुनिया के सभी देश कालिदास की भूमिका निभा रहे है अर्थात जिस डाल पर बैठे है उसी को काट रहे है ,भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि मैं वृक्षों में पीपल हूं,यह कथन आज से 5 हजार साल पहले की है और आज भी पीपल ही ऐसा वृक्ष है जो शत प्रतिशत ऑक्सीजन देती है ,जब हम छोटे थे तो इस वृक्ष के नीचे जाने से डरते थे,पूर्वज कहते थे कि यहां ब्रह्म बाबा का वास है | आज हम अपनी जांच बचाने के लिए यहां उपस्थित है ,परिस्थितियां ही ऐसी है कि अगर हम पर्यावरण के लिए अगर सजग नहीं हुए तो स्थिति कोरोना महामारी से भी भयावह होगी|

बार संघ के पूर्व अध्यक्ष कुलभूषण पांडेय ने कहा कि पर्यवारण तब तक पूर्ण नहीं है जब तक प्रदूषण पर विचार नहीं होगा केवल वृक्ष लगाने से पर्यावरण संतुलित नहीं होगा ,पर्यावरण संतुलन के लिए जल प्रदूषण ,वायु प्रदूषण ,मृदा प्रदूषण आदि को रोकने के लिए मिलजुलकर मुहिम चालना होगा|
अंत में समिति के अध्यक्ष अवधनारायण यादव ने कहा कि हम सब मानव तो जरूर है लेकिन प्रकृति के साथ दानव के रूप में काम किया उसका नतीजा है कि आज यह महामारी हम सब के बीच आयी |गंगा नदी देश की ऐसी नदी है जिसमें कोई बैक्टीरिया नहीं पड़ते| इसका सर्वेक्षण हुआ तो वैज्ञानिकों ने पाया था गंगा हिमालय से निकलती है और वहां पर मौजूद जड़ी बूटियां का अर्क उसमें शामिल होता है|लेकिन महानगरों से निकली औद्योगिक कचरों से यह दूषित होती जा रही है| इसके लिए नदियों के प्रदूषण को रोकना होगा|हमें आस पास खाली पड़े वन भूमि व खुद की भूमि पर पेड़ लगाने होंगे|वृक्षों का कटान रोकना होगा|
कार्यक्रम का संचालन समिति के महासचिव जितेंद चंद्रवंशी ने किया इस मौके पर अधिवक्ता प्रेमचंद्र यादव , राजेन्द्र कुमार , विद्यालय प्रबंधक कृष्ण कुमार मुसई राम , शिवशंकर एडवोकेट ,आशा रावत ,शकुंतला देवी के साथ मीडिया प्रभारी दीपक जायसवाल मौजूद रहे|कार्यक्रम के अंदर में प्रख्यात पर्यावरण विद स्वर्गीय सुंदर लाल बहुगुणा के मृत आत्मा की शांति के लिए समिति के लोगों ने 2 मिनट का मौन रखा और इसे अपूरणीय क्षति बताया|

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