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मामा  के सपनों को पूरा करने की सपना संजोए पिछले 7 सालों से राजनीति में सक्रिय , सत्य प्रकाश पंखा नहीं रहे!

दुद्धी के जप्रतिनिधि के तौर पर सेवा करने की चाह नियति को नहीं था मंजूर

(पीडीआर ग्रुप)

दुद्धी/ सोनभद्र| स्वर्गीय राम प्यारे पनिका पूर्व सांसद
के भांजे सत्य प्रकाश पंखा 67 वर्ष का निधन आज लखनऊ में हो गया , पखवारे भर पूर्व इनकी तबियत खराब थी इन्हें बुखार के साथ ही साथ कमजोरी भी लग रही थी , बेहतर इलाज के वास्ते ये यहाँ से लखनऊ चले गए थे, और वहां घर पर ही उनका इलाज चल रहा था ,इलाज के दरमियान इनकी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गयी ,हालत बिगड़ते देख इनके परिजनों ने इन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में 19 अप्रैल को दाखिल दिलाया था ,अस्पातल में सप्ताह भर इलाज के बाद आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली|आज कोरोना प्रोटोकाल के तहत इनके पार्थिव शरीर को आज लखनऊ के भैसाकुंड घाट पर दाह संस्कार कर दिया गया| इनके छोटे पुत्र जितेंद सेलफोन पर पापा के ना रहने की खबर देते हुए रो पड़े ,बताया कि उन्हें जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों की सेवा करने का अरमान था| बता दे कि सत्य प्रकाश पंखा सचिवालय में अपने कार्यकाल के दौरान अलग अलग 17 विभागों के उपसचिव पद पर अपनी सेवाएं दी थी,रिटायरमेंट से पूर्व वे गृह व कारागार विभाग के उपसचिव पद पर आसीन थे| अपने जीवन काल में यहां दुद्धी क्षेत्र से किसी काम को लेकर लखनऊ जाने वाले लोगों का काम बड़े ही तन्मयता से कराते थे| सोनभद्र के पैतृक गांव खड़िया सोनभद्र के निवासी सत्य प्रकाश पंखा ने अपने पूरे नौकरी काल के दरमियान अपनी ईमानदारी पूर्वक सेवा करते हुए पूरे जीवन की कमाई में आलमबाग में केवल एक पक्का मकान बनवाया था वहीं इनका आशियाना था| परिवार में पत्नी के अलावा दो पुत्र है जिसमें एक रेल में इंजीनियर वहीं दूसरा लेखपाल है|वहीं दो पुत्रियों की विवाह हो चुकी है| 31 जनवरी 2012 में ये सचिवालय से सेवानिवृत हुए तो अच्छा खासा परिवार के बीच रहते थे ,लेकिन एक बात इन्हें हमेशा खटकती थी कि मामा जी स्वर्गीय रामप्यारे पनिका के सपनों को कैसे पूरा करे जो अधूरे रह गए है ,इसी कारण उन्होंने एक मित्र के सुझाव पर 2014 बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और बसपा सुप्रीमों के निर्देश पर दुद्धी विधान सभा में सक्रिय हुए और यहीं रहकर लोगों से मेलजोल बढ़ाने लगे, 2017 की विधान सभा चुनाव में दुद्धी से बहुजन समाज पार्टी से उम्मीदवारी तय थी लेकिन ऐन वक्त पर किन्हीं कारणों से इनका टिकट काट दिया गया ,फिर इन्हें छत्तीसगढ़ के सरगुजा मंडल का प्रभारी बनाया गया| फिर एकाएक राजनीति से इनका मन उखड़ने लगा और ये लखनऊ चले गए ,लेकिन मामा के सपनों को पूरा करने की इच्छा इन्हें बेचैन करने लगी , एक बार फिर बसपा सुप्रीमों के निर्देश पर दुद्धी विधान सभा के प्रभारी बन कर क्षेत्र में पिछले 2 सालों से जनसंपर्क में थे कि कुछ दिनों इनकी तबियत ख़राब हुई ,बेहतर उपचार की आस में ये अपने परिवार जनों के बीच लखनऊ चले गए ,और एक निजी अस्पताल में इलाज के दरमियान अंतिम सांस ली|सत्यप्रकाश पंखा अक्सर कहते थे कि हमें एक बार दुद्धी विधान सभा के लोगों की सेवा करनी है और अपने मामा जी के बताएं आदर्शों पर चलकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में विकास करना है ,लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था ,और सब का प्रिय प्रिय श्री पंखा दुद्धी वासियों से रुक्सत हो लिए| उनके निधन पर दुद्धी वासियों को गहरा झटका लगा है ,दुद्धी के सुरेंद्र अग्रहरी ,यशवंत गौतम , महानन्द पटेल , जौहर हुसैन , राजेश घुसिया ,कल्लन खान , राकेश घुसिया , मो0 वैश ,मो0 कैश ,राजू गुप्ता दीपक जायसवाल, कुतुब खान आदि लोगों ने गहरा शोक जताया है और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार को असीम साहस प्रदान करने की कामना ईश्वर से की है| मांग किया कि ईश्वर इस पुण्य आत्मा को गोलोक में स्थान दे|

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