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विश्व वेट लैंड दिवस पर महाविद्यालय में गोष्ठी का हुआ आयोजन ,छात्र छात्राओं को इसके संरक्षण को किया प्रेरित

(पीडीआर ग्रुप)

दुद्धी/ सोनभद्र| विश्व वेटलैंड दिवस पर आज भाऊ राव देवरस पीजी कालेज के कांफ्रेंस हाल में वन विभाग की तरफ से वेट लैंड कंजेर्वशन विषय पर एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया ,जहाँ छात्र छात्राओं को वेट लैंड कंजेर्वशन( नम भूमि संरक्षण) को लेकर इसके संरक्षण के उपाय बच्चों को सुझाए गए साथ ही पर्यावरण में नम भूमि की महत्ता को भी समझाया गया।
इस दौरान नाटक के माध्यम से जल प्रदूषण के रोकथाम व नम भूमि संरक्षण पर प्रकाश डाला गया|
बॉटनी विज्ञान के प्रोफेसर डॉ हरिओम वर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी चीज की देखभाल की जरूरत तब की जाती है जब वह औसत से खराब हो जाती है।उन्होंने वेटलैंड को परिभाषित करते हुए कहा कि जहां साल में अधिक दिनों तक पानी भरा रहा रहे उसे वेट लैंड कहते है | जैसे ,तालाब ,झील व बांध इत्यादि है ,ये वेट लैंड कल स्तर को बनाये रखते है और दूषित पानी को रिचार्ज कर शुद्ध करते है |पूरी दुनिया में 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetland Day) के रूप में मनाया गया। गौरतलब है कि आर्द्रभूमि दिवस का आयोजन लोगों और हमारे ग्रह के लिये आर्द्रभूमि की महत्त्वपूर्ण भूमिका के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिये किया जाता है।

इसी दिन वर्ष 1971 में ईरान के शहर रामसर में कैस्पियन सागर के तट पर आर्द्रभूमि पर एक अभिसमय (Convention on Wetlands) को अपनाया गया था।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस पहली बार 2 फरवरी, 1997 को रामसर सम्मलेन के 16 वर्ष पूरे होने पर मनाया गया था।
बताया कि तालाबों में मछलियों को रहने के लिए पानी मे डिसॉल्व ऑक्सीजन 6 होना चाहिए|लेकिन आज बढ़ रहे प्रदूषण से जलश्रोतों का अस्तित्व खत्म होते जा रहा है इसे संरक्षित करने की जरूरत है|
मुख्य अतिथि एसडीओ फारेस्ट कुंजमोहन वर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर जीवों के विकास की एक लंबी कहानी है और इस कहानी का सार यह है कि धरती पर सिर्फ हमारा ही अधिकार नहीं है अपितु इसके विभिन्न भागों में विद्यमान करोड़ों प्रजातियों का भी इस पर उतना ही अधिकार है जितना कि हमारा।
नदियों, झीलों, समुद्रों, जंगलों और पहाड़ों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पादपों एवं जीवों (समृद्ध जैव-विविधता) को देखकर हम रोमांचित हो उठते हैं।लेकिन वेट लैंड के सूखने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है,इस लिए अपने आस पास के जलश्रोतों को प्रदूषित ना होने दे ,और ध्यान रखे कि इन जलश्रोतों में किसी भी प्रकार का कूड़ा कचरा ना डालें| कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ नीलांजन मजूमदार ने किया वहीं संचालन डर डॉ आरजू सिंह ने किया| इस मौके पर दुद्धी रेंजर दिवाकर दुबे , प्रोफेसर डॉ0 राकेश कनौजिया ,डॉ अजय कुमार के साथ महाविद्यालय के स्टाफ़ उपस्थित रहें|

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