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सोनभद्र में जनजाति( आदिवासियों) को जनसंख्या अनुपात के हिसाब से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण देने हेतु पुर्व मंत्री ने निदेशक पंचायती राज को भेजा पत्र

(पीडीआर ग्रुप)

दुद्धी/ सोनभद्र| पूर्व मंत्री व सात बार के लगातर विधायक रहे क्षेत्र के कदावर आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सोनभद्र के प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनजाति के जनसंख्या के मुताबिक आरक्षण दिए जाने कि मांग को लेकर निदेशक पंचायती राज उ0 प्र0 लखनऊ को पत्र भेजा है,भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश की आदिवासी जातियों को अनुसूचित जातियों की श्रेणी से 10 आदिवासी जातियों को अनुसूचित जातियों को जनजाति घोषित किया गया ,किंतु आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं कि गयी,इस कारण से जनजातियां त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव आदि से कई पंचवर्षीय चुनाव नहीं लड़ सकें|कई बार संबंधित सरकारों को आरक्षण देने हेतु , अनुरोध किया गया किंतु आरक्षण हेतु कोई कार्यवाही नहीं कि गयी|अंततः रिट संख्या 540/ 2011 मा0 सर्वोच्च न्यायालय में 14 जनपद के लोगों का मुकदमा दायर किया | दिनांक 10 .01.12 के द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग ( पंचायत व नगरीय निकाय)को नियमानुसार उ0 प्र0 में त्रिस्तरीय चुनाव वर्ष 2015 में एसटी को जनसंख्या अनुपात के अनुसार सीट आरक्षित करने का आदेश दिया गया।इसको लेकर प्रमुख सचिव उ0 प्र0 शासन पंचायती राज,विभाग लखनऊ को पत्र दिया गया ,पत्र के परिपेक्ष्य में आरक्षण तो किया गया लेकिन उसे दोषपूर्ण कर दिया गया।
विदित हो कि जनपद सोनभद्र में पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा जनसंख्या जनजाति (एसटी )का है| जनगणना 2011 के अनुसार पूरे प्रदेश का लगभग 20 प्रतिशत जनसंख्या जनपद सोनभद्र में है | इस आधार पर जनपद में 131 सीट प्रधानों का होना चाहिए था लेकिन जनपद में मात्र 28 सीट आरक्षित हुआ | दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जिन जनपदों का नाम शासनादेश में नही है उन्हें भी सम्मिलित किया गया और वहां का आरक्षित सीट रिक्त रहा जैसे कि जनपद कुशीनगर का नाम शासनादेश में 14 जनपदों की सूची में नहीं है ,जहां रिक्त रहा वहां पांच वर्ष तक त्रिस्तरीय कमेटी बनाकर काम किया गया जो कि अन्य जनपद एवमं सोनभद्र के साथ आरक्षण में अन्याय हुआ है ,जिन जनपदों में जनजाति की संख्या कम है ,उन जनपदों में दोषपूर्ण ज्यादा सीट आरक्षित किया गया|
यह भी विदित हो कि संलग्न शासनादेश संख्या 3483/ 24-03- 2003- 3172/03 में समस्त प्रमुख सचिव / सचिव उ0 प्र0 शासन द्वारा उ0 प्र0 के 75 जनपदों में से 14 जनपदों में अनुसूचित जनजाति सरकारी गजट में माना गया ही जो कि 14 जनपदों से संबंधित संलग्नक शासनादेश में विवरण मौजूद है | जिससे शासनादेश का उलंघन एवमं 14 जनपदों के साथ अन्याय किया गया।कहा कि अब त्रिस्तरीय चुनाव 2021 का प्रदेश में आरक्षण का कार्य चल रहा है | जिसमें अनुसूचित जनजाति को शासनादेश के अनुसार घोषित 14 जनपदों को ध्यान रखते हुए जनपदवार जनसंख्या अनुपात में सीटो का आरक्षण करने हेतु संबंधित को आदेश निर्गत करें, जिससे पिछले चुनाव जैसा दोषपूर्ण आरक्षण होने से जनपद सोनभद्र के साथ पुनः अन्याय न हो सके |
उन्होंने मांग किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में 14 जनपदों को जनसंख्या के आधार पर इस चुनाव में सही सही आरक्षण कराये जाने की कृपा करे, जिससे जनजातियों के साथ न्याय हो सके|

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