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शासनादेश को ताख पर रख मूल विद्यालय छोड़ सम्बद्ध हो कर कही और पढ़ा रहे परिषदीय शिक्षक

पीडीआर ग्रुप

दुद्धी-एक जमाना था जब शिक्षा विभाग की नौकरी को ईमानदारी की मिसाल माना जाता था।अब दौर बदल गया है उच्चाधिकारियों से सेटिंग करिए और सुविधानुसार स्कुलो में ड्यूटी करे चाहे शासनादेश जो भी हो दुद्धी बीआरसी पर यहाँ के अधिकारी अपना शासनादेश खुद बना कर अनुपालन कराते है चाहे वजह जो भी हो।दुद्धी ब्लाक संसाधन केंद्र के तमाम आज भी ऐसे स्कूल है जहाँ तैनाती किसी और की है लेकिन सम्बद्ध शिक्षक की भूमिका कही और निभा रहे है ,जबकि शासन ने सम्बद्ध शिक्षकों की शासनादेश को निरस्त कर दिया है लेकिन दुद्धी ब्लाक संसाधन केंद्र पर इसका कोई असर नही पड़ा और दर्जनभर शिक्षक आज भी सम्बद्ध शिक्षक की भूमिका निभा रहे है चाहे वो दुद्धी कस्बा हो या ग्रामीण अंचल क्षेत्र हो।शिक्षकों के द्वारा महीने के अंत मे हस्ताक्षर को लेकर खूब फर्जीवाड़ा होता है| चूंकि वेतन पाने के लिए शिक्षकों को मूल विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर बीआरसी के एक बाबू के पास जमा करना होता है जिस विद्यालय में सम्बद्ध शिक्षक होते है वे वहाँ वे रिकार्ड में नही होते।शिक्षकों के इस फर्जीवाड़े के पीछे इन्ही के उच्चाधिकारियों की मेहरबानी होती है बताया जाता है कि इससे कुछ कमाई ठीक ठाक हो जाती है| बहराल पूरे मामले को खण्ड शिक्षा अधिकारी आलोक कुमार ने नकारा और कहा कोई भी शिक्षक इन दिनों सम्बद्ध नही है केवल कम्प्यूटर आपरेटर ही सम्बद्ध की भूमिका में है। समाजसेवियों ने कहा कि पूरे मामले को शिक्षामंत्री से अवगत कराया जायेगा।

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