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मोदी सरकार का एआईपीएफ कार्यकर्ताओं ने किया विरोध,गांव गांव प्रदर्शन

राष्ट्रव्यापी आवहान पर हुआ गांव-गांव विरोध प्रदर्शन

किया घोषणा कानूनों की वापसी तक होगा आंदोलन

सोनभद्र| किसान विरोधी तीनों कानून और मजदूर विरोधी लेबर कोड को वापस लेकर देश की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए सरकार फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए कानून बनाएं और फसलों की खरीद और भुगतान की गारंटी करे। यह मांग आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट व मजदूर किसान मंच के कार्यकताओं द्वारा किसानों के राष्ट्रव्यापी आव्हान पर गांव-गांव किए प्रदर्शनों में उठाई। अम्बानी-अडानी की मोदी सरकार का विरोध करते हुए एआईपीएफ नेताओं ने कहा कि सरकार को स्वामीनाथन कमीशन की संस्तुतियों के अनुसार किसानों को फसलों के लागत मूल्यों के डेढ़ गुना ज्यादा दाम पर भुगतान करना चाहिए, सरकारी तंत्र द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए किसान व नागरिक प्रतिनिधियों को लेकर बड़े पैमाने पर सहकारी समितियों के निर्माण करना चाहिए और इसके जरिए गांव व कस्बा स्तर पर फसलों की खरीद और स्टोरेज की व्यवस्था कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करना चाहिए। इसके लिए सरकार को कृषि मद पर बजट में ज्यादा खर्च करने की जरूरत थी जिसे सरकार ने नहीं किया। उलटे सरकार देश हित में जारी किसानों आंदोलन का अभी भी दमन करने, उसे बदनाम करने और उसके खिलाफ षडयंत्र करने में ही लगी हुई है। जिस पर उसे रोक लगाकर किसान विरोधी कानूनों, काम के घंटे बारह करने वाले लेबर कोड और विधुत संशोधन अधिनियम वापस लेना चाहिए।
प्रदर्शनों का नेतृत्व प्रदेश उपाध्यक्ष कांता कोल, कृपाशंकर पनिका, राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, श्रीकांत सिंह, मनोहर गोंड़, वंशलाल गोंड़, रामनाथ गोंड़, इंद्रदेव खरवार, महावीर गोंड़, सूरज कोल, संतलाल बेग, कैलाश चैहान, शिव प्रसाद गोंड़, राजकुमार खरवार, अंतलाल खरवार आदि ने किया।

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